लखनऊ। राम मंदिर में चंदा चोरी से पूरे देश में शर्मसार उत्तर प्रदेश सरकार नई मुसीबत में है । अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार सड़क निर्माण और ठेका आवंटन को लेकर अब विपक्ष के निशाने पर है। एक ओर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर विवादों में घिरी पीएनसी इंफ्रा लिमिटेड (PNC Infra Ltd.) को लगभग 3,500 करोड़ रुपये की नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का ठेका मिलने से सियासी बहस तेज हो गई है।
विपक्ष इस पूरे मामले को कथित “चंदा के बदले ठेका” मॉडल से जोड़कर सरकार को घेर रहा है। इसी बीच कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विपक्ष का आरोप है कि जिन सड़कों को विकास की पहचान बताया गया था, उन्हीं पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं और सरकार जवाब देने की स्थिति में नहीं दिख रही।
पीएनसी इंफ्रा वही कंपनी है जिसके कुछ निदेशकों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के कुछ अधिकारियों के खिलाफ वर्ष 2024 में सीबीआई ने कथित रिश्वत देकर ठेके हासिल करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। मामला अभी जांच के अधीन है और अदालत से कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।
यही नहीं, कंपनी पर अवैध खनन के मामले में 104 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा है। इसके बावजूद कंपनी को एक और बड़ी परियोजना मिलना विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
कंपनी के प्रमुख शेयरधारकों में भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन का नाम भी जुड़ता रहा है। वे कंपनी के व्होल-टाइम डायरेक्टर रह चुके हैं, जबकि वर्तमान में कंपनी का संचालन उनके परिवार के अन्य सदस्य कर रहे हैं। विपक्ष इसे राजनीतिक संरक्षण का मामला बता रहा है, हालांकि सरकार या कंपनी की ओर से ऐसे आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दोनों कार्यकाल में भ्रष्टाचार मुक्त शासन और पारदर्शी व्यवस्था को अपनी पहचान बताया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि किसी कंपनी पर गंभीर जांच और विवाद पहले से मौजूद हैं तो उसे बार-बार बड़े सरकारी ठेके किन मानकों के आधार पर दिए जा रहे हैं। सरकार यदि इस पर स्पष्ट जवाब देती है तो चुनावी साल में विपक्ष के आरोपों की धार भी कमजोर हो सकती है।
अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सड़क, एक्सप्रेसवे और विकास कार्य भी चुनावी मुद्दे बनने तय हैं। यदि एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और ठेका प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समय रहते संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो विपक्ष इसे चुनावी अभियान का बड़ा हथियार बनाने की कोशिश करेगा। वहीं सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह अपने विकास मॉडल और पारदर्शिता के दावों पर जनता का भरोसा कायम रख सके।
बताना मुनासिब होगा कि नए नए एक्सप्रेस वे के गड्ढे इस समय देश भर में सुर्खियां बटोर रहे हैं।
